कुंडली मिलान — जन्म-विवरण से 36 गुण मिलान
वर और वधू के जन्म-विवरण भरें। परिणाम में 36 गुण, दोष व निवारण, मंगल-मिलान और कारणों सहित निर्णय मिलेगा; विस्तृत PDF (लगभग 20 से 28 पन्ने) में मिलान का पूरा अध्ययन — हर कूट, दोष, मंगल-मिलान, दोनों का विवाह-विचार और उपाय।
कुंडली मिलान (Kundli Milan) क्या है
विवाह से पहले वर और वधू की जन्म-कुंडलियों को साथ रखकर देखना कुंडली मिलान कहलाता है — इसे गुण मिलान, मेलापक या अष्टकूट मिलान भी कहते हैं। इसका मुख्य भाग अष्टकूट है: आठ कूट, कुल 36 गुण। आठों कूट दोनों के जन्म के समय के चन्द्रमा से निकलते हैं — चार चन्द्र-राशि से और चार जन्म-नक्षत्र से।
यहाँ का मिलान 36 गुणों पर नहीं रुकता। साथ में देखा जाता है:
- मंगल दोष — दोनों कुंडलियों में अलग-अलग, और फिर दोनों को साथ रखकर;
- रज्जु, वेध, महेन्द्र और स्त्री-दीर्घ — अष्टकूट से बाहर के चार कूट;
- दोनों की चल रही दशा, और वह पहला कालखंड जिसमें दोनों कुंडलियों में विवाह-योग साथ-साथ प्रबल हों।
मिलान के लिए क्या चाहिए
दोनों की जन्म-तिथि, जन्म-समय और जन्म-स्थान। चन्द्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार कर लेता है, इसलिए ग़लत समय से जन्म-नक्षत्र बदल सकता है — और उसके साथ तारा, योनि, गण और नाड़ी के गुण भी। मंगल दोष लग्न से भी गिना जाता है, और लग्न जन्म-समय और स्थान से बनता है। नाम वैकल्पिक है।
36 गुण — आठ कूट और उनके अंक
| कूट | अधिकतम गुण | किससे निकलता है |
|---|---|---|
| वर्ण | 1 | चन्द्र-राशि |
| वश्य | 2 | चन्द्र-राशि (धनु और मकर में चन्द्रमा के अंश से) |
| तारा | 3 | जन्म-नक्षत्र — वर से वधू तक और वधू से वर तक की गिनती |
| योनि | 4 | जन्म-नक्षत्र का पशु-चिह्न |
| ग्रह-मैत्री | 5 | दोनों चन्द्र-राशियों के स्वामियों की मित्रता |
| गण | 6 | जन्म-नक्षत्र — देव, मनुष्य या राक्षस |
| भकूट | 7 | दोनों चन्द्र-राशियों के बीच की दूरी |
| नाड़ी | 8 | जन्म-नक्षत्र — आदि, मध्य या अन्त्य |
| कुल | 36 |
हर कूट का पूरा नियम, अंक-तालिका और एक हल किया हुआ उदाहरण: 36 गुण मिलान तालिका।
कितने गुण मिलने चाहिए — और निर्णय कैसे बनता है
गुणों से पहला स्तर बनता है:
| गुण (36 में) | गुणों से बना स्तर |
|---|---|
| 18 से कम | अनुशंसित नहीं |
| 18 से 24 | मध्यम — उपाय सहित |
| 25 से 32 | अच्छा |
| 33 या अधिक | उत्तम |
पर केवल गुण-गिनती निर्णायक नहीं। नीचे के दो दोषों में से हर एक, जो कटा न हो, निर्णय को एक स्तर नीचे ले आता है:
- नाड़ी दोष — दोनों की एक ही नाड़ी, और कोई निवारण नहीं;
- मंगल दोष — केवल एक पक्ष मांगलिक, और उसका दोष किसी नियम से कटा न हो।
रज्जु दोष — दोनों के नक्षत्र एक ही रज्जु में — दक्षिण की दस-कूट पद्धति का कूट है; हमारा मिलान उसे सावधानी में गिनता है, उससे स्तर नहीं घटता।
भकूट दोष, गण दोष, वेध, महेन्द्र और स्त्री-दीर्घ सावधानी के रूप में लिखे जाते हैं — वे स्तर नहीं बदलते; भकूट और गण की कमी 36 गुणों में पहले ही गिनी जा चुकी होती है। परिणाम में स्तर घटाने वाला हर कारण नाम से लिखा होता है।
परिणाम में क्या मिलता है
- 36 में से कितने गुण मिले, और आठों कूटों की तालिका — हर कूट में वर और वधू दोनों का पक्ष;
- अंतिम निर्णय, गुणों से बना स्तर अलग से, और जिन कारणों से स्तर घटा;
- सावधानियाँ, और मेल के बल (जैसे "नाड़ी भिन्न — पूर्ण अंक");
- दोनों का मंगल दोष और मंगल-मिलान;
- विस्तारित कूट — रज्जु, वेध, महेन्द्र और स्त्री-दीर्घ;
- दोनों के लग्न, चन्द्र-राशि, जन्म-नक्षत्र, आयु और चल रही बड़ी दशा;
- पहली साझा विवाह-खिड़की, तब दोनों की आयु के साथ;
- जो दोष लगे, उनके उपाय।
विस्तृत मिलान-रिपोर्ट — PDF
परिणाम-पन्ने से विस्तृत रिपोर्ट PDF में ली जा सकती है, हिंदी या अंग्रेज़ी में — लगभग 20 से 28 पन्ने, केवल मिलान: दोनों के कुंडली-चक्र, हर कूट के दोनों पक्ष और निवारण-नियम, दशकूट और विस्तारित कूट, मंगल-मिलान, दोनों का सप्तम-भाव अध्ययन, दोनों की दशाएँ एक कैलेंडर पर और साझा विवाह-काल, उपाय और सामान्य प्रश्न। किसी एक की पूरी जन्म-कुंडली अलग जन्म कुंडली रिपोर्ट में है।
ध्यान रखने की बातें
- वर्ण, वश्य, योनि, गण और नाड़ी चन्द्र-राशि और जन्म-नक्षत्र से निकले ज्योतिषीय वर्ग हैं। इनका किसी की जाति, कुल, चरित्र या शरीर से कोई सम्बन्ध नहीं — ये केवल कूट-गणना की इकाइयाँ हैं।
- भारत में विवाह की न्यूनतम आयु वधू के लिए 18 और वर के लिए 21 वर्ष है। इससे कम आयु हो तो परिणाम यह स्पष्ट लिखता है — तब मिलान दोनों कुंडलियों का अध्ययन है, आज के विवाह की सलाह नहीं।
- मिलान किसी विवाह को रोकता नहीं। वह बताता है कि कौन-सा कूट कहाँ कम पड़ा, कौन-सा दोष लगा और शास्त्र उसका क्या निवारण कहता है — निर्णय परिवारों का है।
- विवाह का मुहूर्त अलग विषय है — वह गोचर और पंचांग से निकाला जाता है; यह मिलान तारीख़ नहीं बताता।
अपनी अकेली कुंडली देखनी हो तो: जन्म कुंडली बनाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुंडली मिलान में कितने गुण मिलने चाहिए?
हमारे मिलान का पैमाना: 18 से कम — अनुशंसित नहीं; 18 से 24 — मध्यम, उपाय सहित; 25 से 32 — अच्छा; 33 या अधिक — उत्तम। पर गुण-गिनती अकेली निर्णायक नहीं: बिना निवारण नाड़ी दोष और एक पक्ष का न कटा मंगल दोष (मध्यम या उससे तीव्र — हल्का दोष केवल सावधानी है) — हर एक निर्णय को एक स्तर नीचे लाता है।
क्या केवल नाम से कुंडली मिलान हो सकता है?
यह मिलान जन्म-विवरण से होता है। अष्टकूट चन्द्र-राशि और जन्म-नक्षत्र से गिना जाता है, और मंगल दोष, रज्जु और दशाएँ जन्म-समय और स्थान के बिना निकलती ही नहीं। परंपरा में नाम का पहला अक्षर जन्म-नक्षत्र के पाद से रखा जाता है, पर हर नाम ऐसे नहीं रखा जाता — इसलिए नाम से निकला नक्षत्र जन्म-नक्षत्र ही हो, यह ज़रूरी नहीं।
क्या मांगलिक का विवाह मांगलिक से ही होना चाहिए?
शास्त्र कहता है कि दोनों पक्ष मांगलिक हों तो दोष परस्पर कट जाता है — यही परिहार है, और हमारा मिलान इसी नियम से चलता है। जिसका मंगल दोष किसी नियम से पहले ही कट चुका हो, उसे मांगलिक नहीं गिना जाता। एक ही ओर दोष हो और वह कटा न हो, तब — दोष मध्यम या उससे तीव्र हो तो — निर्णय एक स्तर घटता है और विवाह से पहले मंगल-शांति कही गई है; हल्के दोष पर सरल मंगल-शांति पर्याप्त है, स्तर नहीं घटता।
गुण कम हैं — क्या विवाह नहीं हो सकता?
मिलान किसी को रोकता नहीं। वह बताता है कि कौन-सा कूट कहाँ कम पड़ा, कौन-सा दोष लगा, और शास्त्र उसका क्या निवारण कहता है। निर्णय परिवारों का है — और परस्पर समझ को शास्त्र भी सबसे ऊपर रखता है।
फ़ॉर्म भरते ही क्या दिखता है?
दोनों के जन्म-विवरण भरते ही 36 गुण, आठों कूट, दोष, मंगल-मिलान और कारणों सहित निर्णय दिखते हैं। विस्तृत PDF रिपोर्ट परिणाम-पन्ने से ली जाती है।
क्या यह मिलान विवाह की तारीख़ बताता है?
नहीं। यह दोनों की दशाओं से वे कालखंड बताता है जिनमें विवाह-योग प्रबल है, और वह पहला कालखंड भी जब दोनों के कालखंड साथ पड़ते हैं। विवाह का मुहूर्त अलग विषय है — वह गोचर और पंचांग से निकाला जाता है।